Dr. Srimati Tara Singh

May 26, 2008

मुझको कल का एक पल न मिला

Filed under: gazal — tarasingh @ 1:52 am

मुझको  कल  का   एक  पल  न मिला

जो   आज  मिला  , वो   कल  न मिला 

मुद्दतों   से   गुम    हैं   जो   सवाल मेरे

उन   सवालों   का    हल         मिला 

बेवफ़ा  की  आँखों में समंदर तो  दीखा

मगर  समंदर  का  कहीं  तल न मिला 

उसकी खफ़गी  ,अंगारे बन बरसती रही

रहम  का   एक    बूँद जल   न   मिला 

सुनकर मेरे गम के फ़साने  , सभी रोये

मगर उसकी पेशानी पर एक बल मिला

Theme pack from WPMUDEV by Incsub.

Powered by Wordpress Hosted on MyKavita