मुझको कल का एक पल न मिला
मुझको कल का एक पल न मिला
जो आज मिला , वो कल न मिला
मुद्दतों से गुम हैं जो सवाल मेरे
उन सवालों का हल न मिला
बेवफ़ा की आँखों में समंदर तो दीखा
मगर समंदर का कहीं तल न मिला
उसकी खफ़गी ,अंगारे बन बरसती रही
रहम का एक बूँद जल न मिला
सुनकर मेरे गम के फ़साने , सभी रोये
मगर उसकी पेशानी पर एक बल न मिला
Khoob, khas kar anttim chaar linen
Comment by figaar — June 27, 2008 @ 2:23 pm
good
Comment by figaar — September 5, 2008 @ 5:46 pm